Monday, November 30, 2009

माँ

माँ तू बहुत याद आती .....

जब होश सम्भाला,तेरा पलू पकड़कर चलते पाया |
तू जहा जाती, तेरा पलू पकड़कर वहा चला आता |

रात को रोता ,तू लोरी सुना सुला देती
मिट्टी खाता,तो तू मुझे नहला देती |

शरारत इतना करता,फिर भी तू नहीं झुंझलाती,
थोडा बड़ा हुआ,स्कूल जाने को,
तेरे माथे पर चिंता की लकीरे पड़ने लगी|

मेरे स्कूल जाने पर,
खिड़की पर बैठे ,आने का इंतजार करती तू|

बहुत याद तू आती है माँ........

कभी गिरता तो,तेरे मुख से आह निकलती,
खरोच आने पर, तेरे जिस्म से खून निकलता |

मेरे जिद्ध के आगे,तुझे झुकना पड़ा |
परेशान कितना किया है न माँ,

जब बीमार होता,तू बैठ सारी रात बिता देती|
जब मैं कही जाता, आँखों से काजल उतार मेरे माथे पर लगा देती|

तू बहुत याद आती है माँ...........!!!!

नीरज कुमार गुप्ता
३०-११-०९

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