माँ तू बहुत याद आती .....
जब होश सम्भाला,तेरा पलू पकड़कर चलते पाया |
तू जहा जाती, तेरा पलू पकड़कर वहा चला आता |
रात को रोता ,तू लोरी सुना सुला देती
मिट्टी खाता,तो तू मुझे नहला देती |
शरारत इतना करता,फिर भी तू नहीं झुंझलाती,
थोडा बड़ा हुआ,स्कूल जाने को,
तेरे माथे पर चिंता की लकीरे पड़ने लगी|
मेरे स्कूल जाने पर,
खिड़की पर बैठे ,आने का इंतजार करती तू|
बहुत याद तू आती है माँ........
कभी गिरता तो,तेरे मुख से आह निकलती,
खरोच आने पर, तेरे जिस्म से खून निकलता |
मेरे जिद्ध के आगे,तुझे झुकना पड़ा |
परेशान कितना किया है न माँ,
जब बीमार होता,तू बैठ सारी रात बिता देती|
जब मैं कही जाता, आँखों से काजल उतार मेरे माथे पर लगा देती|
तू बहुत याद आती है माँ...........!!!!
नीरज कुमार गुप्ता
३०-११-०९
जब होश सम्भाला,तेरा पलू पकड़कर चलते पाया |
तू जहा जाती, तेरा पलू पकड़कर वहा चला आता |
रात को रोता ,तू लोरी सुना सुला देती
मिट्टी खाता,तो तू मुझे नहला देती |
शरारत इतना करता,फिर भी तू नहीं झुंझलाती,
तेरे माथे पर चिंता की लकीरे पड़ने लगी|
मेरे स्कूल जाने पर,
खिड़की पर बैठे ,आने का इंतजार करती तू|
बहुत याद तू आती है माँ........
कभी गिरता तो,तेरे मुख से आह निकलती,
खरोच आने पर, तेरे जिस्म से खून निकलता |
मेरे जिद्ध के आगे,तुझे झुकना पड़ा |
परेशान कितना किया है न माँ,
जब बीमार होता,तू बैठ सारी रात बिता देती|
जब मैं कही जाता, आँखों से काजल उतार मेरे माथे पर लगा देती|
तू बहुत याद आती है माँ...........!!!!