Monday, October 15, 2012

कोशिश

  कोशिश
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कभी, लास्ट बेंच पर बैठकर
सपने देखा करता था !!
आज उसे पूरे करने का
कोशिश करता हु !!

कभी, भीड़-भाड़ में अपने आप को
खोजता था !!
आज भीड़ में अलग सा दिखने का
कोशिश करता हु !!

कभी,न जाने कितने अडचनों को
पार किया है हमने !!
आज उसका आनंद लेने की कोशिश करता हु !!

कभी, एकांत में बैठकर कुछ
सोचा करता था !!
आज उसे पन्नो पर उतारने की
कोशिश करता हु !!

                              नीरज कुमार गुप्ता
                                   १४-१०-१२

Tuesday, October 9, 2012

इंसान

वक़्त ने वक़्त को बदला !
वक़्त ने किस्मत को !
किस्मत ने जीवन बदला !
जीवन  ने विश्व को !

वक़्त ने वक़्त को बदला
वक़्त ने ही इंसान को !

                             नीरज कुमार गुप्ता
                                   ७-१०-१२

Monday, September 24, 2012

गाँव

गाँव
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एक गाँव मेरा,जो गंगा किनारे बसा !!
पीपल के छावँ में मेरा घर वहा !

आँगन में खड़ा नीम मुझे देख रहा !
कहता देखो गाँव तुम्हरा बदल गया !

ना गाँव में वो मिट्टी की सोंधी खुशबू थी
ना वो खेत की हरियाली !

ना घरो से निकलता धुँआ था
ना वो रोटी की मीठी सी खुशबू !

ना दाल में वो स्वाद था
ना चूल्हे वाली भात !

कभी गुलज़ार हुआ करता था
सुबह,शाम !
आज सब कुछ खामोश सा लगता है !
 देखो कितना बदल गया है मेरा गाँव !

लालटेन के रौशनी में,
बच्चो का पढना !
चारपाई पर बैठकर;
रेडियो से प्रादेशिक समाचार सुनना !!

भोर में बर्तनों के टकराने की,
कुओ में चाप छप-छप की आवाज !!
मंदिर में घंटो की आवाज,
लोगो और पशुओ के,
खेत-खलियान में जाने की आवाज !!

आज सब कुछ खामोश सा लगता है!
देखो कितना बदल गया है मेरा गाँव !
एक गाँव मेरा, जो गंगा के किनारे बसा !!


                                नीरज कुमार गुप्ता
                                     १५-०९-१२

Wednesday, September 12, 2012

आज़ाद


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सरसराती हवाओं के झोकों ने !
सिरहाने रखे मेरे डायरी के पन्नो
को ऐसे उल्टा !
शायद !
फडफडाती पन्नो के ऊपर
उकरे हुए शब्द!
आज़ाद होना चाहते है !

नीरज कुमार गुप्ता
११-०९-१२

Friday, August 31, 2012

शाम

कब वह सुहानी शाम होगी !
बदलो से बरसात होगी !
ठंडी पवन पुरवैया बहेगी !
बिजली की चमक होगी  !


नदी के लहरों का शोर होगा !
हंसो का लौटता झुण्ड होगा !
मोरनी के झुमने की...
आवाज होगी !
कब वह सुहानी शाम होगी !
 बदलो से बरसात होगी !

कब 'वो' चार यार मिलेंगे !
बातों से भरी कहानी होगी !
जिनके हाथो में चाय की..
प्याली होगी !
थोड़ी देर की लिए आजादी होगी !
कब वह सुहानी शाम होगी !

बातो में मशहगुल रहेंगे !
फ़ोन साइलेंट मोड पर रहेंगे !
चाय के आर्डर आते रहेंगे !
अपनी यादे ताज़ा करते रहेंगे !


न जाने कब वह सुहानी...
शाम आयेगी !!
न जाने कब 'वो' चार यार मिलेंगे !!

                                      नीरज कुमार गुप्ता
                                           १४-०८-१२

Tuesday, May 8, 2012

अब रिश्तों की डोर प्यार से नहीं..!!!
बल्कि अब पैसो के डोर से बंधती है...!!
                                 
                                    नीरज कुमार गुप्ता
                                       २९-०३-१२

Friday, April 13, 2012

मन की पीड़ा

मन की पीड़ा..!!
मेरे काले आंसुओ से..!
डायरी के पन्नो..
को रंग रही है..!!

डायरी के एक हल्के पन्ने ने...
मेरे मन को हल्का कर दिया...!!
मेरे मन की पीड़ा को अपना लिया..!!!

"मेरे डायरी के पन्नो से"
  नीरज कुमार गुप्ता
       १२-०३-१२

Friday, March 2, 2012

दस फीट

थका था,हारा था..!
साथ में रिक्शा लिए खड़ा था..!
कोई टोक ना दे कोई रोक ना दे..
सोने से मुझे..!!
मै दस फीट की ज़मीन खोज रहा था..!

लुंगी का चादर,सीट का तकिया..
चार ईट का चूल्हा,
स्ट्रीट लाइट के नीचे..!
दस फीट का आशियाना मेरा..!!

स्ट्रीट लाइट के नीचे अपने कपडे निचोड़ता हु..!!
कुछ ना मिला तो चुड़ा,
गुड खाकर सो जाता हु...!
मोटर,सांड,कुत्ता,से..
बेफिक्र होकर...!!
दस फीट ज़मीन पर सो जाता हु...!!

और सूरज के उगने के पहले 'उनकी' दस फीट की ज़मीन छोड़ जाता हु..!!!

नीरज कुमार गुप्ता
०१-०३-१२

परछाई

------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------- ढलती शाम में, आज बिजली ...