अन्जान रिश्ते
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कुछ अन्जान रिश्ते बिखरे थे,
कोशिश की थी समेटने की.
कुछ बिखरते गए,
कुछ और अन्जान होते गए !
कुछ रिश्ते पराये होते गए,
तो कुछ पराये अपने होते गए !
कुछ अन्जान रिश्ते बिखरे थे,
कोशिश की थी समेटने की !
नीरज कुमार गुप्ता
१-०७-१५
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कुछ अन्जान रिश्ते बिखरे थे,
कोशिश की थी समेटने की.
कुछ बिखरते गए,
कुछ और अन्जान होते गए !
कुछ रिश्ते पराये होते गए,
तो कुछ पराये अपने होते गए !
कुछ अन्जान रिश्ते बिखरे थे,
कोशिश की थी समेटने की !
नीरज कुमार गुप्ता
१-०७-१५
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