Friday, December 9, 2011

फर्क

ग़म तो बचपन में भी हुआ करता था..!!
फर्क इतना था की उस वक़्त....!!
ढूध पीकर सो जाया करता था ....
और आज 'बीयेर' से कम चला लेते है...!!

कमीना तो उस  वक़्त भी था....
फर्क इतना है की...!
उस वक़्त लोग...!
शरारत कह कर भूल जाया करते थे...!!
और आज वही 'नलायक' कह कर बुलाते है..!!

                            नीरज कुमार गुप्ता
                             
                               ०४-१२-११

परछाई

------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------- ढलती शाम में, आज बिजली ...