Monday, May 9, 2016

माँ

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आज भी बुरी नज़रो से,
महफूज़ हु !
माँ तेरे 'उस' नैनो के काजल से !!

सामना करता हुँ,
परेशानियों का डट कर !
माँ तेरे 'उस' दूध के घुट से !!

थक के हारा नहीं,
आज भी !
माँ तेरे 'उस' आँचल के छाव से !!

धीरे- धीरे सही,
आगे बढ़ रहा हुँ !
माँ तेरे 'उस' चरणों के ,
आशीर्वाद से !!

              नीरज कुमार गुप्ता
                 08-05-2016 

परछाई

------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------- ढलती शाम में, आज बिजली ...