Tuesday, March 29, 2011

'वो'

'वो' रहती थी मेरे आँखों में..!!!!
खेलती थी मेरे आंशुओ से...!!!
ये आंशुये भी कितने कमीने थे..!!!
जो 'होठो' पर पंहुचने से पहले सुख जाया करते थे....!!!!
नीरज कुमार गुप्ता
२०-०३-११

परछाई

------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------- ढलती शाम में, आज बिजली ...