'वो' रहती थी मेरे आँखों में..!!!!
खेलती थी मेरे आंशुओ से...!!!
ये आंशुये भी कितने कमीने थे..!!!
जो 'होठो' पर पंहुचने से पहले सुख जाया करते थे....!!!!
नीरज कुमार गुप्ता
२०-०३-११
Tuesday, March 29, 2011
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