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ढलती शाम में,
आज बिजली कौंधी थी
मेरे घर के पास
तेरे परछाई को मैंने महसूस किया था !!
नीरज कुमार गुप्ता
२७/०८/२०१७
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ढलती शाम में,
आज बिजली कौंधी थी
मेरे घर के पास
तेरे परछाई को मैंने महसूस किया था !!
नीरज कुमार गुप्ता
२७/०८/२०१७