Saturday, August 26, 2017

पहली बार


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देखा था,पहली बार आपको,

कमरे में,
धीरे धीरे आते हुए,

कुछ पल बाद,
बैठी मेरे पास
सामने वाले सोफे पर !

देखा था,पहली बार आपको,
मुस्कुराते हुए !

शर्म भरी आँखों से,
आपने मुझे निहारा था,
 गौर किया था,
मैंने एक बार !

देखा था,पहली बार आपको,
मैंने साड़ी में !

माथे से साड़ी का
पलू का सरकना !
बड़े अदब से,
पलू को सर पर रखना ,
अच्छा लगता था !

देखा था,पहली बार आपको,
सुकून भरी आँखों से !

जब पास खड़ी हुयी मेरे,
आपके हांथो का मेरे हांथो का
श्पर्श करना,
कुछ कह रही थी दिल की धड़कने !

वो पल भर की,
छोटी सी मुस्कान
कितना सुकून देती है मुझे !


देखा था,पहली बार आपको,
अपना बनाने के लिए !


                                नीरज कुमार गुप्ता
                                   ०७/०८/२०१७ 

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