----------------------------------------------------------------
----------------------------------------------------------------
देखा था,पहली बार आपको,
कमरे में,
धीरे धीरे आते हुए,
कुछ पल बाद,
बैठी मेरे पास
सामने वाले सोफे पर !
देखा था,पहली बार आपको,
मुस्कुराते हुए !
शर्म भरी आँखों से,
आपने मुझे निहारा था,
गौर किया था,
मैंने एक बार !
देखा था,पहली बार आपको,
मैंने साड़ी में !
माथे से साड़ी का
पलू का सरकना !
बड़े अदब से,
पलू को सर पर रखना ,
अच्छा लगता था !
देखा था,पहली बार आपको,
सुकून भरी आँखों से !
जब पास खड़ी हुयी मेरे,
आपके हांथो का मेरे हांथो का
श्पर्श करना,
कुछ कह रही थी दिल की धड़कने !
वो पल भर की,
छोटी सी मुस्कान
कितना सुकून देती है मुझे !
देखा था,पहली बार आपको,
अपना बनाने के लिए !
नीरज कुमार गुप्ता
०७/०८/२०१७
No comments:
Post a Comment