Wednesday, September 12, 2012

आज़ाद


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सरसराती हवाओं के झोकों ने !
सिरहाने रखे मेरे डायरी के पन्नो
को ऐसे उल्टा !
शायद !
फडफडाती पन्नो के ऊपर
उकरे हुए शब्द!
आज़ाद होना चाहते है !

नीरज कुमार गुप्ता
११-०९-१२

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परछाई

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