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सरसराती हवाओं के झोकों ने !
सिरहाने रखे मेरे डायरी के पन्नो
को ऐसे उल्टा !
शायद !
फडफडाती पन्नो के ऊपर
उकरे हुए शब्द!
आज़ाद होना चाहते है !
नीरज कुमार गुप्ता
११-०९-१२
------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------- ढलती शाम में, आज बिजली ...
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