Friday, March 2, 2012

दस फीट

थका था,हारा था..!
साथ में रिक्शा लिए खड़ा था..!
कोई टोक ना दे कोई रोक ना दे..
सोने से मुझे..!!
मै दस फीट की ज़मीन खोज रहा था..!

लुंगी का चादर,सीट का तकिया..
चार ईट का चूल्हा,
स्ट्रीट लाइट के नीचे..!
दस फीट का आशियाना मेरा..!!

स्ट्रीट लाइट के नीचे अपने कपडे निचोड़ता हु..!!
कुछ ना मिला तो चुड़ा,
गुड खाकर सो जाता हु...!
मोटर,सांड,कुत्ता,से..
बेफिक्र होकर...!!
दस फीट ज़मीन पर सो जाता हु...!!

और सूरज के उगने के पहले 'उनकी' दस फीट की ज़मीन छोड़ जाता हु..!!!

नीरज कुमार गुप्ता
०१-०३-१२

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