कौन कहता है कि,
सूरज अपनी रोशनी से चाँद को छुपा लेता है,|
बल्कि चाँद के आगे सूरज फीका हो जाता है,
चाँद कि रोशनी से शुबह,चांदनी सा लगने लगता है,|
ये उसका मासूम सा चेहरा ,
हल्की-हल्की चाल ,
बड़ी-बड़ी आँखे, आँखों में नशा,
चमकता चेहरा ,होठो पर मुस्कान,
ये सब सूरज को भी फीका कर रहा था,|
मैं भी खड़ा,यिस सुबह कि चांदनी रात में,
चाँद को निहार रहा था,
उसकी आँखे इसारा कर रही थी, पास बुला रही थी,
मरी आँखे भी बर्फ सी हो गया थी,
उस शुबह कि चांदनी रात में ,
फिर धीरे-धीरे चाँद ,
सूरज कि तेज रोशनी में,शुन्य हो गया,|
मै भी खड़े-खड़े यही सोचता रहा,
काश हर दिन मेरा शुबह चांदनी रात होता,.....!!!
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