शायद अभी भी डरता है वोह मुझसे........
कभी देखा नहीं, परखा, सोचा, और समझा भी नही...
याद है, मुझे एक बार
नाम पुछा था मैंने उसका
फिर भी जाने क्यूँ
डरता है वोह मुझसे
शायद कभी..किसी मोड़ पर मुलाक़ात हो,
आँखें भी चार हो
सोचता रहता हूँ ..क्या करेगा वोह
डरना भी प्यार का हिस्सा तो नहीं
शायद इसीलिए..डरता हो वोह मुझसे...
नीरज कुमार गुप्ता
कभी देखा नहीं, परखा, सोचा, और समझा भी नही...
याद है, मुझे एक बार
नाम पुछा था मैंने उसका
फिर भी जाने क्यूँ
डरता है वोह मुझसे
शायद कभी..किसी मोड़ पर मुलाक़ात हो,
आँखें भी चार हो
सोचता रहता हूँ ..क्या करेगा वोह
डरना भी प्यार का हिस्सा तो नहीं
शायद इसीलिए..डरता हो वोह मुझसे...
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