Saturday, November 21, 2009

जीवन

तेरे आँखों में अपना नशा खोजता हू,
तेरे बालों के छाये में अपना परछाई खोजता हू,
तेरे होठो पर अपने जज्बात खोजता हू,
तेरे सासों में अपना जीवन खोजता हू,.........
शायद एक दिन मेरी मंजिल मिल जाये|
नीरज कुमार गुप्ता
१७-११-०९

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परछाई

------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------- ढलती शाम में, आज बिजली ...