Tuesday, March 30, 2010

पतझड़

पतझड़ के पत्तो पर
अपना नाम लिख आया हू|
चैत के मौसम में,
पछुओ हवा के झोको से ये,
कभी ना कभी तेरे आँगन में गिरेंगे |
जब तू आँगन में निकलोगी,
ये तेरे बालो और पैरो से लिपट जाएंगे |
जब-जब तुझसे पत्ते,
स्पर्श किया करेंगे |
मै अपने आप को तुम से लिपटा पाऊंगा |
मेरे उस स्नेह पत्ते को ,
अपने गले से लगाकर रखना|
उसे कही अपने किताबो के अन्दर,
पन्नो में दबाकर रखना|
जब मेरी याद आये,
उसे गले से लगा लेना.........!!
बस एक बार याद कर लेना............!!!

नीरज कुमार गुप्ता
३०/०३/१०

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