Monday, September 26, 2011

मै फिर से उड़ना चाहता हू..

मै फिर से उड़ना चाहता हू..!!

पतंग के डोर से आगे...!
तितिलियो के पंख से आगे...!
फूलो के खुशबुओ से आगे...!
भवरो के आवाज से आगे...!

बिजली के चमक से आगे...!
तुफानो के थपेड़ो से आगे...!
बदलो के रफ़्तार से आगे...!
समुन्द्र के लहरों से आगे...!
सूर्य के किरणों से आगे...!

एक सोच से आगे...!
एक बार मै फिर से उड़ना चाहता हू....!!

नीरज कुमार गुप्ता
२५-०९-११

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परछाई

------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------- ढलती शाम में, आज बिजली ...