Saturday, September 17, 2011

सपने

रात भर कितने सपने बनते, बिगड़ते गये...!!!
कुछ याद थे, कुछ नहीं...!!!
पर जो याद थे,...!!
आधे अधूरे सही....!!
पर वो साथ थे....

नीरज कुमार गुप्ता
१७-०९-११

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