Thursday, January 29, 2015

नोटबुक

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मेरे नोटबुक के पन्ने कुछ दोस्तों
की तरह थे !
जिस पे नाम लिखा था,
कुछ पे अपना राज़ लिखा था !

'वो' बच गए !

बाकी समय के साथ कुछ
मुड़ गए,कुछ पलट गए,
कुछ में सिलवटे पड़ गए,
कुछ गायब हो गए  !!

                        नीरज कुमार गुप्ता
                            २६-०१-१५ 

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