Wednesday, November 13, 2013

भोर

भोर
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भोर हुआ था,
बस मैं बैठा कुछ
खिड़की से देखने की कोशिश कर
रहा था !!

पर फॉग ने, कुछ दुरी  को अपने
आगोश में ले रखा था !!

बस के हॉर्न से,
फॉग की बुँदे विबरेट कर रहे थे,
आने वाले को आगाह कर रहे थे !!

बस का स्पीड तेज हो रहा था,
गुलाबी ठण्ड,
से पोर -पोर सिहर रहा था !!

फ़ॉग की कुछ बुँदे,
आकर पलकों से टकरा रहे थे !!
बिछड़ने के अफ्रेड से,
आंशु बहा रहे थे !!

कुछ समय पश्चात,
स्काई में लाली उठाने लगा था !!
फ़ॉग को आग अपने आगोश,
में ले रहा था !!

मैं भी अपने डेस्टिनेशन तक,
आगे बढ़ रहा था !!

नीरज कुमार गुप्ता
4-10-2013 

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