Tuesday, April 30, 2013

अस्सी


अस्सी पर अस्सी खोजता हु !!

साधुओ के जटाओ में,
 कमंडल लिए हुए हांथो में
निर्मल गंगा खोजता हु !!

डूबते सूरज के रोशनी में,
टकराती धाराओं के घाटो से,
ऊपर उठती कुछ बूंदों में,
वो चमक खोजता हु !!
एक निर्मल गंगा खोजता हु !

शाम के समय,
गंगा श्रृंगार में,
घंटो के पुकार में,
जनमानस को खोजता हु !

फूलो से पटी,
नाओं के अम्बार में,
निर्मल गंगा खोजता हु !

अस्सी पर अस्सी खोजता हु !!

                     नीरज कुमार गुप्ता
                   वाराणसी (अस्सी घाट)
                          २८-०४-२०१३

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